Class12th Chemistry Notes In Hindi
विलयन एवं उनके अनुसंख्य गुण (Solution And Its Colligative Property)
*विलयन
:-दो या दो से अधिक पदार्थों के एक समांग मिश्रण को विलयन कहा जाता है।
विलयन में जिस पदार्थ की मात्रा प्रायः
अधिक होती है,उसे विलायक कहा जाता है। जबकि जिसकी मात्रा कम
होती है उसे विलेय कहा जाता है।
विलेय + विलायक =विलयन
➤किसी भी विलयन में विलायक एक ही होता
है ,किन्तु विलेय की संख्या एक से अधिक भी हो सकती
है।
*विलयन
का सांद्रण
⇒किसी
विलयन के प्रति एकांक आयतन में उपस्थित विलेय की मात्रा को विलयन का सांद्रण कहा
जाता है।
➠विलयन का सांद्रण निम्नलिखित प्रकार से
व्यक्त किया जाता है :-
1. द्रव्यमान प्रतिशत
2. आयतन प्रतिशत
3. द्रव्यमान आयतन प्रतिशत
4. मोललता
5. मोलरता
6. नार्मलता
7. मोल प्रभाज
8. PPM
1. द्रव्यमान प्रतिशत :-किसी विलयन के 100gm में
उपस्थित विलेय की मात्रा को भी ग्राम के रूप में व्यक्त किया जाए तो उसे विलयन का
द्रव्यमान प्रतिशत कहा जाता है।
द्रव्यमान प्रतिशत = विलेय की मात्रा(gm) *100 / विलयन
की मात्रा(gm)
➤इसे w/w के रूप में सूचित किया जाता है।
2. आयतन प्रतिशत :-किसी विलयन के 100ml में
उपस्थित विलेय की मात्रा को भी,यदि ml में व्यक्त किया जाए तो उसे आयतन प्रतिशत कहा
जाता है।
➤जिसे V/V के द्वारा सूचित किया जाता है।
आयतन प्रतिशत = विलेय की मात्रा(ml) *100 / विलयन की मात्रा(ml)
3. द्रव्यमान आयतन प्रतिशत :-किसी विलयन के 100ml में
उपस्थित विलेय की मात्रा को यदि gm के रूप में व्यक्त किया जाए तो उसे द्रव्यमान
आयतन प्रतिशत कहा जाता है।
➤इसे W/V के द्वारा सूचित किया जाता है।
द्रव्यमान आयतन प्रतिशत = विलेय की मात्रा(gm) *100 / विलयन की मात्रा(ml)
4. मोललता :-प्रति Kg विलायक में उपस्थित विलेय के मोलो की
संख्या को उस विलयन की मोललता कहा जाता है।
➤इसे 'm' के द्वारा सूचित किया जाता है।
मोललता = विलेय के मेलों की संख्या /विलायक का भार(Kg)
5. मोलरता :-प्रति लीटर विलयन में उपस्थित विलेय
की मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता कहा जाता है।
➤इसे 'M' के द्वारा सूचित किया जाता है।
मोलरता = विलेय के मोलों की संख्या / विलयन का आयतन(lit)
6. नार्मलता :-किसी विलयन के एक लीटर में उपस्थित
विलेय पदार्थ के तुल्यंकों की संख्या को विलयन की नार्मलता कहा जाता है।
➤इसे 'N' के द्वारा सूचित किया जाता है।
नार्मलता = विलेय के तुल्यांकों की
संख्या / विलयन का आयतन(lit)
7. मोल प्रभाज :-किसी विलयन में उपस्थित विलेय
अथवा विलायक के मोलों की संख्या तथा विलयन के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को
मोल प्रभाज कहा जाता है।
विलेय का मोल प्रभाज = विलेय की मोलों
की संख्या / विलयन के कुल मोलों की संख्या
विलायक मोल प्रभाज = विलायक के मोलों
की संख्या / विलयन के कुल मोलों की संख्या
Note:-किसी भी विलयन में उपस्थित विलेय एवं विलायक के
मोल प्रभाज का योगफल हमेशा एक के बराबर होता है।
8. PPM :-किसी विलयन के 10 लाख वें भाग में उपस्थित विलेय की
मात्रा को PPM कहा जाता है।
*विलेयता (Solubility):-निश्चित ताप पर 100gm विलायक में घुलने वाली विलेय पदार्थ की मात्रा को उस विलयन की विलेयता कहा जाता है। यदि किसी विलयन का तापमान बढ़ा दिया जाए तो उसके विलेयता का मान भी बढ़ जाता है। किन्तु यह सिर्फ द्रव में ठोस के विलयन के लिए लागु होया है। परन्तु यदि विलयन द्रव में गैस का हो तो ताप का मान बढ़ाने से विलेयता का मान घट जाता है। किन्तु दाब का मान बढ़ाने से विलेयता का मान बढ़ जाता है।
*हेनरी
का नियम (Henry's Law)
⇒हेनरी
के नियमानुसार किसी गैस में द्रव की विलेयता उसके दाब पर निर्भर करता है। अर्थात,किसी
द्रव में घुलने वाली गैस का मोल प्रभाज उसके आंशिक दाब का सिधासमानुपाती होता है।
यदि किसी द्रव में घुलने वाली गैस का
मोल प्रभाज 'X' तथा उस पर लगने वाला दाब का मान 'P' हो
तो हेनरी के नियमानुसार P ∝ X होगा।
*ठोस-ठोस
का विलयन :-वैसा विलयन जिसमें विलेय और विलायक दोनों ठोस के रूप में उपस्थित है ,उसे
ठोस-ठोस का विलयन कहा जाता है।
जैसे :-पीतल ,कांसा
,नाइक्रोम
➠यह विलयन मुख्यतः दो प्रकार का होता
है।
1. प्रतिस्थनात्मक ठोस विलयन
2. अन्तराली ठोस विलयन
1. प्रतिस्थनात्मक ठोस विलयन :-वैसा ठोस विलयन
जिसमें विलेय एवं विलायक के परमाणुओं का आकार लगभग समान होने के कारण विलेय के
परमाणु विलायक के परमाणु को विस्थापित करके उसका स्थान ग्रहण कर लेता है ,इस
प्रकार बना विलयन प्रतिस्थनात्मक ठोस विलयन होता है।
जैसे :-Cu तथा Zn का विलयन
2. अन्तराली ठोस विलयन :-वैसा विलयन जिसमें विलायक
के परमाणुओं का आकार विलेय से बड़ा होने के कारण विलेय के कण उनके अन्तराली स्थानों
में फंस जाता है तो ,इस प्रकार बने विलयन को अन्तराली ठोस विलयन कहा
जाता है।
जैसे :-Ni तथा C का विलयन
*वाष्पदाब
(Vapour Pressure):-साम्यावस्था के समय किसी द्रव की सतह पर वाष्प
के द्वारा लगने वाले दाब को उस द्रव का वाष्पदाब कहा जाता है।
यदि किसी द्रव का तापमान दिया जाए तो
उसके वाष्पदाब का मान भी बढ़ जाता है।
*वाष्पदाब
का अवनमन(Lawering Of Vapour Pressure):-जब किसी उबलते हुए द्रव में किसी ठोस पदार्थ को
मिलाया जाता है तो द्रव का उबलना कम हो जाता है ,क्योकि उसके वाष्पदाब का मान घट जाता
है ,इसी प्रक्रिया को वाष्पदाब का अवनमन कहा जाता
है।
*रॉउल्ट
का नियम (Roult's Law)
⇒रॉउल्ट
के नियमानुसार वाष्पदाब का आपेक्षिक अवनमन उसमें उपस्थित विलेय पदार्थ के
मोलप्रभाज के बराबर होता है।
यदि किसी शुद्ध विलयन का वाष्पदाब P०
है तथा किसी ठोस को मिलाने के बाद इसका वाष्पदाब घटकर Ps हो
जाता है तो रॉउल्ट के नियमानुसार,
Po – Ps / Po = n / n- N
*आदर्श
विलयन (Ideal Solution)
⇒वैसा
विलयन जो सभी ताप एवं सांद्रण पर रॉउल्टके नियम का पालन करता है ,आदर्श
विलयन कहलाता है।
जैसे :-बेंजीन तथा टॉलूईन का विलयन ,पेंटेन
तथा हेक्सेन का विलयन
*अनादर्श
विलयन (Non-Ideal Solution)
⇒वैसा
विलयन जो सभी ताप एवं सांद्रण पर रॉउल्टके नियम का पालन नहीं करता है ,अनादर्श
विलयन कहलाता है।
जैसे :-जल तथा एल्कोहल का विलयन ,जल
तथा सुक्रोज का विलयन
जो विलयन अनादर्श होता है ,उसका
वाष्पदाब आदर्श विलयन से कम या अधिक होता है।
➠अतः यह दो प्रकार का विचलन दर्शाता है।
1. धनात्मक विचलन (Positive Deviation)
2. ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation)
1. धनात्मक विचलन:-यदि किसी विलयन का वाष्पदाब
आदर्श विलयन के वाष्प दाब से अधिक हो जाता है तो उसे धनात्मक विचलन कहा जाता है।
2. ऋणात्मक विचलन :-यदि किसी विलयन का वाष्पदाब
आदर्श विलयन के दाब से कम हो तो उसे ऋणात्मक विचलन कहा जाता है।
*परासरण (Osmosis):-वैसी प्रक्रिया जिसमें विलायक के कण तनु विलयन से सांद्रण विलयन की ओर अर्द्धपरगम्य झिल्ली को पार करके स्वतः गमन करने लगता है तो इस प्रक्रिया को परासरण कहा जाता है।
परासरण की क्रिया तब तक चलती रहती है
जब तक की दोनों विलयनों का वाष्प दाब बराबर न हो जाए।
*परासरण
दाब (Osmotic Pressure):-किसी विलयन पर आरोपित वह बाह्य दाब जिसके कारण
तनु विलयन का वाष्पदाब सांद्र विलयन के वाष्प दाब के बराबर हो जाता है ,परासरण
दाब कहलाता है।
➤इसे л के द्वारा सूचित किया जाता है।
*उल्टा
परासरण (Reverse Osmosis):-वैसी प्रक्रिया जिसमें विलायक के कण सांद्र
विलयन से तनु विलयन की ओर अर्द्धपरगम्य झिल्ली से होकर गमन करने लगता है तो इस
प्रक्रिया को उल्टा परासरण कहा जाता है।
*विसरण
(Diffusion):-वैसी प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ के कण एक
स्थान से दूसरे स्थान तक स्वतः गमन करने लगता है तो इस प्रक्रिया को विसरण कहा
जाता है।
*वान्टहॉफ
का नियम (Vanthoff's Law):-परासरण दाब से संबधित वान्टहॉफ नामक वैज्ञानिक
ने तीन नियमों का प्रतिपादन किया जिसे वान्टहॉफ का नियम कहा जाता है।
1. वान्टहॉफ का पहला नियम :-वान्टहॉफ के पहले नियम
के अनुसार किसी विलयन का परासरण दाब उस विलयन में उपस्थित विलेय के सांद्रण का
सीधा समानुपाति होता है।
अर्थात,
Л ∝ C →
(1)
2. वान्टहॉफका दूसरा नियम :-वान्टहॉफ के दूसरे
नियम के अनुसार किसी विलयन का परासरण दाबउसके ताप का सीधा समानुपाती होता है।
अर्थात,
Л ∝ T →
(2)
समी 1 और 2 से ,
Л ∝ CT
Л ∝ CRT
जहाँ R एक विलयन नियतांक है। (R=0.082)
3. वान्टहॉफका तीसरा नियम :-वान्टहॉफ के तीसरे
नियम के अनुसार यदि समान ताप एवं समान आयतन पर दो विलयनों का परासरण दाब समान हो
तो उसमें उपस्थित विलेय के अणुओं की संख्या भी समान होती है।
अर्थात,
यदि Л ∝ Л2 तो
n1 = n2
*अणुसंख्य
गुणधर्म (Colligative Property):-किसी विलयन का वह गुण जो उस विलयन में उपस्थित
विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है ,अणुसंख्य गुणधर्म कहलाता है।
जैसे :-परासरण दाब,वाष्पदाब
का अवनमन ,हिमांक अवनमन
*हाइपरटोनिक
विलयन :-वैसा विलयन जिसका परासरण दाब दूसरे विलयन के परासरण दाब से अधिक होता है ,हाइपरटोनिक
विलयन कहा जाता है।
*आइसोटोनिक
विलयन :-वैसा विलयन जिसका परासरण दाबदूसरे विलयन के परासरण दाब के बराबर होता है ,उसे
आइसोटोनिक विलयनकहा जाता है।
*हाइपोटोनिक
विलयन :-वैसा विलयन जिसका परासरण दाबदूसरे विलयन के परासरण दाब से कम होता है, हाइपोटोनिक
विलयन कहलाता है।
*एजियोट्रॉपिक
या स्थिरक्वथी विलयन :-वैसा विलयन जिसमें विलेय की एक निश्चित मात्रा मिलाने के
बाद उसका क्वथनांक समान हो जाता है,एजियोट्रॉपिक या स्थिरक्वथी विलयन कहलाता है।
जैसे :-5% इथेनॉल का जलीय विलयन भी एजियोट्रॉपिक
होता है।
*क्वथनांक
उन्ननयन (Elevation In Boiling Point)
⇒जब
किसी शुद्ध विलायक में अवाष्पशील विलेय पदार्थ को मिलाया जाता है तो विलयन का
क्वथनांक बढ़ जाता है ,इसी घटना को क्वथनांक उन्ननयन कहा जाता है।
➤इसे 'ΔTb' के द्वारा सूचित किया जाता है।
रॉउल्ट के नियमानुसार किसी विलयन का
क्वथनांक उन्नयन उस विलयन के सांद्रण का सीधा समानुपाती होता है।
ΔTb ∝ Cm
ΔTb ∝ KbCm
जहाँ Kb एक नियतांक है ,जिससे
क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक कहा जाता है।
*हिमांक
अवनमन(Depression to Freezing Point):-जब किसी शुद्ध विलायक में किसी ठोस पदार्थ को
मिलाया जाता है तो उसका हिमांक पहले से कम हो जाता है,उसी
घटना को हिमांक अवनमन कहा जाता है।
➤इसे 'ΔTf' से सूचित किया जाता है।
रॉउल्ट के नियम के अनुसार किसी विलयन
का हिमांक अवनमन उस विलयन के सांद्रण का सीधा समानुपाती होता है।
अर्थात,
ΔTf ∝ Cm
ΔTf ∝ Kf Cm
जहाँ K एक नियतांक है,जिसे
हिमांक अवनमन स्थिरांक कहा जाता है।
*वान्टहॉफ गुणांक:-जब किसी पदार्थ को किसी विलयन में घुलाया जाता है तो संयोजन अथवा वियोजन हो जाने के कारण उसके अणुओं की संख्या जितना गुणा से बढ़ जाता है या घट जाता है ,उसे वान्टहॉफ गुणांक कहा जाता है।
Class 12th Mobile App Download
Class12th chemistry notes in hindi,Solution And Its Colligative Property notes in hindi,विलयन एवं उनके अनुसंख्य गुण notes in hindi,12th chemistry all chapter notes in hindi,12th notes pdf download,12th notes pdf free download,bihar board 12th notes in hindi,ncert 12th chemistry notes


0 टिप्पणियाँ